बीस दिन पहले मुखबिर ने रजनीश अग्रवाल से पूछा था आप राज्यसभा उम्मीदवार क्यों नहीं हो सकते तब उन्होंने मुस्कुरा कर कहा संभव नहीं
मध्य प्रदेश भाजपा कोटे से खाली हो रही दो राज्यसभा सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान हो चुका है। पहला नाम तरुण चुघ है तो दूसरा नाम रजनीश अग्रवाल है जिनको लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं। वास्तव में ऐसा भाजपा में ही देखने को मिलता है। जहां चेहरे की नहीं काम और काबिलियत की परख होती है। रजनीश अग्रवाल उन्हीं कार्यकर्ताओं की बानगी हैं। कद से छोटे हैं लेकिन उनकी राजनीतिक समझ उनके कद को इतना बड़ा बनाती हैं कि भाजपा की प्रत्येक रणनीति का वो अहम हिस्सा होते हैं। रजनीश अग्रवाल सिर्फ संगठनात्मक गतिविधियों में ही दक्ष नहीं हैं बल्कि उनकी वाक कटुता भी प्रसंशनीय है। मीडिया के सामने जिस प्रकार से वो पार्टी की बात रखते हैं उसमें भी उनका कोई तोड़ नहीं है। हमेशा अपने काम में मस्त रहने वाले और चेहरे पर हल्की मुस्कान रखने वाले रजनीश अग्रवाल को भाजपा को डिजिटल बनाने का जिम्मा मिला था।जिसे राजनीश अग्रवाल ने पूरी सिद्धात से पूरा किया और अपनी भूमिका को बखूबी निभा कर भाजपा को डिजिटल बनाया। बुंदेलखंड में मंडी बामौरा के रहने वाले रजनीश अग्रवाल भाजपा के बेहद सक्रिय और जमीनी कार्यकर्ताओं में शुमार किए जाते हैं। रजनीश अग्रवाल मध्य प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन का काम देख रहे हैं जिसे भाजपा की चुनावी मशीनरी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। करीब बीस दिन पहले मुखबिर के प्रतिनिधि से रजनीश अग्रवाल की बात हुई थी तब मुखबिर ने उनसे सवाल किया था कि उम्मीदवार आप क्यों नहीं हो सकते। तब रजनीश अग्रवाल ने कहा था कि संभव ही नहीं है कि उनका नाम आएगा। आखिर भाजपा के नेतृत्व ने रजनीश अग्रवाल के नाम पर मुहर लगाई और यह बताया कि भाजपा में चेहरे को देख कर नहीं बल्कि समर्पण भाव से काम करने वाले कार्यकर्ता को महत्व दिया जाता है। और उसी के फल स्वरुप रजनीश अग्रवाल आज भाजपा के निर्विवाद राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किए गए हैं।
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