भोपाल RTO कार्यालय को किससे खतरा है निजी एजेंसियों से सुरक्षा कर्मी हायर कर सुरक्षा व्यवस्था की गई है दुरुस्त आखिर कौन देता है वेतन
भोपाल का आरटीओ पहले से ही भ्रष्टाचार का अड्डा माना जाता था। लेकिन अब कार्यालय को शहर से बाहर कर ऐसा लगता है सरकार ने भ्रष्टाचार करने का लाइसेंस दे दिया है। आरटीओ साहब खुद तीन बजे के बाद ही कार्यालय आते हैं लेट आने पर कहते हैं मंत्रालय गए थे। अगर तीन बजे के पहले वो आफिस आते हैं तो डराने और धमकाने के लिए ही आते हैं। बकायदा उनकी तरफ से समय आरक्षित किया जाता है। ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार की जाती है जो आरटीओ की करतूतों को जनता के सामने लाने का प्रयास करते हैं। फिर उन्हें बड़े प्यार से फोन करके आफिस में मिलने बुलाया जाता है जहां RTO की कुर्सी पर बैठे साहब अपनी साहबगीरी झाड़ने लगते हैं। वो धमकाने के साथ सामने वाले को बेइज्जत करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। मजे की बात यह है कि साहब ने एक पिस्टल धारी प्राइवेट सुरक्षा कर्मी भी हायर कर रखा है। जो कक्ष के बाहर पिस्टल लेकर हमेशा खड़ा रहता है। लोगों को डराने के लिए उसे बीच-बीच में अंदर बुला लिया जाता है। बात सिर्फ एक सुरक्षा कर्मी की नहीं बाहर करीब 12 सुरक्षा कर्मी और तैनात किए गए हैं जो निजी एजेंसी से हायर किए गए हैं। उन सभी सुरक्षा कर्मियों के वेतन का भुगतान कौन करता है इसकी जानकारी किसी को नहीं है। RTI ऐक्ट के तहत जानकारी मांगी जाए तो आरटीओ की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी जाती है। अब सवाल इस बात का उठता है कि भोपाल के आरटीओ कार्यालय को किससे खतरा है। जिसके लिए निजी एजेंसी से सुरक्षा कर्मी हायर किए गए हैं। और उन सुरक्षा कर्मियों का वेतन कहां से आता है वो अपने आप में एक बड़ा सवाल बन कर रह गया है। कार्यालय के बाहर दलालों की फौज बढ़ती जा रही है। बगैर दलालों के सहारे के किसी का लाइसेंस नहीं बनता है। जबकि वहीं से साहब का रोज का आना जाना होता है उसके बाद भी आरटीओ में दलाल प्रथा हावी है। किसी भी मामले में आरटीओ साहब से बात करो तो वो अपना ज्ञान ऐसे बघारने लगते हैं जैसे इस पूरी धरती पर ईश्वर ने एक ही हरिश्चंद पैदा किया है और वो वहीं हैं। लेकिन साहब इतने ज्ञानी होने के बाद भी इतना नहीं समझ पाए कि भीड़ में सबसे आगे चोर ही खड़ा होकर चोर-चोर चिल्लाता है।
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