बीजेपी के सहयोग सेल में क्यों नहीं आ रहे कार्यकर्ता क्या सरकार और संगठन पर कार्यकर्ताओं का भरोसा नहीं रहा
मप्र बीजेपी की सरकार और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए प्रदेश कार्यालय में सहयोग सेल का आयोजन किया जा रहा है। इस नवाचार को शुरु हुए करीब एक महीने होने चले हैं। जिसके तहत सोमवार से शुक्रवार तक एक से तीन बजे तक मंत्रियों को प्रदेश कार्यालय में बैठना होता है। इस सहयोग सेल के अनुसार पहले एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री को बैठने की व्यवस्था बनाई गई थी लेकिन हफ्ते भर में ही यह व्यवस्था चरमरा गई और अब एक मंत्री प्रदेश कार्यालय में बैठने लगे। बैठक की विशेष बात यह है कि हर कार्यकर्ता व्यवस्थित तरीके से मंत्री के पास पहुंच सके और अपनी समस्या मंत्री को बता सके उसके लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया। लेकिन जब Muhhbir ने इसकी पड़ताल की तो पता चला कि पांच से दस कार्यकर्ता प्रदेश कार्यालय पहुंच रहे हैं। बांकी समय मंत्री अपना समय पूरा होने का इंतजार करते रहते हैं। जब यह योजना शुरु हुई तब ये माना जा रहा था कि अभी कार्यकर्ताओं को ठीक से जानकारी नहीं हुई है जिसके कारण कार्यकर्ता कम संख्या में आ रहे हैं लेकिन सहयोग सेल को शुरु हुए करीब एक महीना पूरा होने वाला है। लेकिन सहयोग सेल में कार्यकर्ताओं की घटती रुचि कुछ अलग ही संकेत दे रही है। कुछ कार्यकर्ताओं से इस बात को समझने का प्रयास भी किया गया तो उनका यही कहना है कि मंत्रियों के बैठने और आवेदन ले लेने भर से समस्याएं खत्म नहीं होती हैं। उन समस्याओं पर ऐक्शन हो तो कार्यकर्ताओं का विश्वास बढ़े। लेकिन एक दिन में एक विभाग का मंत्री बैठता है जिस विभाग का मंत्री बैठा है वहां तक तो ठीक है लेकिन दूसरे विभाग का मंत्री बैठा है तो उनके आवेदन को कितना महत्व मिलेगा। क्योंकि मंत्री तो संबंधित विभाग के पास भेज देंगे लेकिन उस आवेदन पर अन्य विभाग कितनी गंभीरता से काम करेंगे यह एक बड़ा सवाल बन गया है। प्रदेश कार्यालय के पदाधिकारी सहयोग सेल को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं। पदाधिकारियों का भी यह मानना है कि इस व्यवस्था में कुछ अमूल चूक परिवर्तन की जरुरत है। क्योंकि इसके पीछे सरकार और संगठन की मंशा तो ठीक है लेकिन उसके नतीजे सही नहीं आने के कारण यह नजर आ रहा है कि सहयोग सेल के प्रति कार्यकर्ताओं का विश्वास नहीं जम पा रहा है। इसके पीछे और भी तर्क ढूंढे जा रहे हैं कि ठंड का सीजन होने के कारण कार्यकर्ता प्रदेश कार्यालय तक नहीं आ रहे हैं। लेकिन इसके पीछे एक और बड़ा कारण भी देखने को मिल रहा है। जिस दिन से भाजपा में अप्रत्याशित नियुक्तियां होने लगी हैं। जिस प्रकार से पदाधिकारियों की नियुक्ति हुई उससे पार्टी के कार्यकर्ता काफी नाराज नजर आ रहे हैं। कुछ कार्यकर्ताओं का यह मानना है कि कुछ जगहों पर सरप्राइज ठीक है लेकिन हर नियुक्ति में पार्टी चौंकाने का काम कर रही है जिससे कार्यकर्ताओं के उत्साह में भारी गिरावट आई है। उन्हें यह महसूस होने लगा है कि कितनी भी मेहनत कर लो पार्टी में पद तो 'पउआ' वालों को ही मिलना है मतलब जिसकी पहुंच नदी का घर तक है उसी को पार्टी आगे बढ़ाएगी। इन्हीं सब चीजों के कारण सहयोग सेल भी पिटने लगा है।
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