'मोहन' को 'राजा' का मिला साथ 'मुरली' की ऐसी धुन बजी कि 'जमीन' के अंदर दबे सारे राज बाहर आए
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में राज्यसभा से चल रहा विवाद एक बार फिर सतह में आ गया है। कांग्रेस पार्टी के अंदर गृह युद्ध की स्थिति लगातार बनी हुई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा राज्य सरकार पर लगाए गए गंभीर आरोपों को पार्टी के ही वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा सिरे से खारिज कर दिया गया है। इस घटनाक्रम से प्रदेश कांग्रेस में मची अंदरूनी खींचतान की चर्चा तेज हो गई है। गौरतलब है कि सीएम मोहन यादव पर जमीन खरीदी का कांग्रेस ने पहले भोपाल में आरोप लगाया और जब उन आरोपों पर भोपाल में दाल नहीं गली तो फिर कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में प्रेसवार्ता की थी। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया गया था कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन 'वीर भारत न्यास' को मात्र एक रुपये में आवंटित कर दी गई है। उनके द्वारा दावा किया गया था कि इस ट्रस्ट के सदस्य मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार हैं और मुख्यमंत्री को इस भारी अनियमितता पर जवाब देना चाहिए। इन आरोपों के ठीक उलट, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा उज्जैन में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान जीतू पटवारी के इन दावों को पूरी तरह से तथ्यहीन करार दिया गया। उनके द्वारा दस्तावेज दिखाते हुए यह स्पष्ट किया गया कि 'वीर भारत न्यास' एक शासकीय (सरकारी) ट्रस्ट है, जिसके अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री होते हैं. ऐसे में सिंधिया राजघराने की इमारत को एक रुपये में ट्रस्ट को दिया जाना किसी प्रकार की अनियमितता की श्रेणी में नहीं आता। दिग्विजय सिंह के इस बयान बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने खुद सरकारी दस्तावेजों के आधार पर अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को आइना दिखाने का काम किया है। उनके द्वारा जीतू पटवारी को तथ्य और प्रमाण के आधार पर आरोप लगाने की सलाह दी गई है। दूसरी ओर पूर्व मंत्री पीसी शर्मा द्वारा जीतू पटवारी का बचाव किया गया है। पूर्व मंत्री ने कहा कि बीजेपी द्वारा दिग्विजय सिंह के बयान को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उनके द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को दोहराया गया है।
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