कांग्रेस की रणनीति से बाहर कमलनाथ और अरुण यादव जैसे बड़े नेता जवाब देने से बच रही कांग्रेस
मध्य प्रदेश कांग्रेस बदलाव के दौर से गुजर रही है लेकिन कमलनाथ,कांतीलाल भूरिया और अरुण यादव जैसे नेताओं को साइड लाइन करके पार्टी आगे बढ़ेगी इस बात का अंदाजा किसी को नहीं था। बुधवार को दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी जिसमें जीतू पटवारी,उमंग सिंघार,दिग्विजय सिंह और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी शामिल हुए। लेकिन इस बैठक में कमलनाथ,अरुण यादव,कांतीलाल भूरिया और अजय सिंह जैसे नेताओं को शामिल नहीं किया गया। बैठक की तस्वीर बाहर आते ही प्रदेश भर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। इस बात में कोई सक नहीं कि कांग्रेस के लिहाज से यह एक बड़ी बैठक थी और इस बैठक में पार्टी के बड़े नेराओं का शामिल न होना पार्टी की आंतरिक कलह को बाहर करता हुआ दिखाई पड़ रहा है। एक तरफ मिशन 2028 की तैयारी में जुटी कांग्रेस पार्टी अलग-अलग अभियान चला रही है दूसरी तरफ पार्टी को मजबूत करने के लिए जब दिल्ली में बैठक होती है तो बड़े नेता नदारत रहते हैं उससे पार्टी की तैयारियों का स्तर पता चलता है कि कांग्रेस के नेता चुनाव के लिए कितने तैयार है। वहीं बंद कमरे में हुई बैठक की चर्चा ने जब सियासी टंप्रेचर को बढ़ाया तो प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि किसे बुलाना है और किसे नहीं यह हमारा आंतरिक मामला है। मतलब साफ है कि कांग्रेस के आंतरिक फैसलों के लायक अब कमलनाथ और अरुण यादव नहीं बचे यानि भविष्य की कांग्रेस में अब इन नेताओं के लिए कुछ ज्यादा नहीं बचा है। हांलांकि इस पूरे मामले को लेकर अब मप्र कांग्रेस की तरफ से अलग-अलग तरह के बयान आ रहे हैं जिसके तहत यह भी साफ नहीं हो रहा है कि अब जिन नेताओं को दिल्ली की बैठक में शामिल नहीं किया गया उनके बारे में पार्टी क्या योजना बना रही है।
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