'अमृत काल' में जहर रुपी पानी पिलाने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई लेकिन जनप्रतिनिधियों पर सरकार कब करेगी फैसला
इंदौर में जहरीला पानी पिलाने के मामले में सरकार ने कर्मचारियों पर कार्रवाई कर खुद की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का प्रयास किया है। नगरीय प्रशासन मंत्री खुद इंदौर से आते हैं और वहां के प्रभारी मंत्री सीएम मोहन यादव हैं। देश का सबसे स्वच्छ शहर का खिताब लेकर जनप्रतिनिधियों ने खुद की पीठ भी थपथपा ली लेकिन कभी यह नहीं सोचा कि सिर्फ सड़क अथवा कालोनियां साफ कर लेने से स्वच्छता नहीं आती है। इंदौर में जैसे ही मौत ने तांडव करना शुरु किया तो कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों की आंख खुलनी शुरु हुई। जुवानी तौर पर चौथा स्तंभ कहलाने वाली मीडिया की आवाज बंद करने का पूरी तरह से प्रयास किया गया। यहां तक कि मीडिया कर्मियों को अपशब्द भी कहा गया लेकिन मीडिया की आवाज बंद करने में सरकार नाकाम रही। जनता को खुश करने के लिए शुक्रवार रात को आनन-फानन में बैठक भी बुलाई गई लेकिन जिस नतीजे की सभी को उम्मीद थी वही हुआ। कर्मचारियों पर तो ऐक्शन ले लिया गया यहां तक कि निगम कमिश्नर को भी वहां से हटा दिया गया लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि पर कार्रवाई न कर सरकार ने यह बता दिया कि अच्छा हो तो उसकी तारीफ मंत्रियों को मिलेगी लेकिन बुरा हो तो उसका खामियाजा अधिकारियों और कर्मचारियों को ही भुगतना पड़ता है। मजे की बात यह है कि आजादी का अमृत काल मनाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इतनी बड़ी घटना में कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई। जिन पीएम मोदी को देश का चौकीदार और सेवक कहा जाता है वही पीएम इस पूरे मामले में और अपने जनप्रतिनिधियों के मामले में चुप्पी साधे अब तक बैठे हैं।
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