भाजपा संगठन में 'ब्राह्मणों' को मिला महत्वपूर्ण दायित्व आगे और लोगों के आने की संभावना
मप्र में कुछ समय से हर राजनीतिक पार्टी में ब्राह्मणों के खिलाफ एक नैरेटिव सेट करने का प्रयास किया जा रहा है। उसका नतीजा यह निकल रहा है कि अब किसी भी वर्ग का कोई भी व्यक्ति ब्राह्मणों के बारे में कुछ भी बेधड़क बोल रहा है। उसकी बानगी हाल ही में आइएएस संतोष वर्मा की जुवानी देखने को मिली है। सरकार और संगठन में भी जब ब्राह्मणों के भागीदारी की बात आती है तो ऐसे दर्शाया जाता है कि जैसे देश में ब्राह्मण वर्ग है ही नहीं अथवा है तो उसके पास सबकुछ है। यही हाल पिछले कुछ वर्षों में भाजपा की सरकार और संगठन में देखने को मिलता रहा है जहां ब्राह्मण वर्ग को पार्टी से साइड लाइन करने की कोशिश होती रही है। सरकार में तो राजेन्द्र शुक्ल और राकेश शुक्ला को मंत्री पद का दर्जा देकर यह बताने का प्रयास किया गया है कि सरकार ब्राह्मण हितैषी है जबकि ये दोनों मंत्री ऐसे हैं जो ब्राह्मण कुल के तो हैं लेकिन ब्राह्मणों से इनका कोई सरोकार नहीं है। यही हालात कमोवेश संगठन में भी रहे हैं। यहां भी ब्राह्मण वर्ग को लगातार उपेक्षित किया जाता रहा है। और जब कोई कठिन परिस्थिति आती है तो संगठन को ब्राह्मण नेता ही दिखते हैं और उन्हीं को आगे करके स्थितियों पर नियंत्रण पाने की कोशिश होती है। पिछले महीने भाजपा ने प्रदेश कार्यकारिणी घोषित की थी जिसमें खाना पूर्ति के लिए ब्राह्मण वर्ग को स्थान मिला था। शायद इन परिस्थितियों को संघ भांप गया और समय रहते संघ ने ऐसा फैसला लिया जिससे सारी स्थितियां भी पलट गई। शनिवार को तीन नियुक्तियां हुई तीनों ब्राह्मण पदाधिकारी थे। जिसमें मनोरंजन मिश्रा,आशुतोष तिवारी और जितेन्द्र लिटोरिया जैसे ब्राह्मणों को मोर्चा-प्रकोष्ठ और कार्यालय व्यवस्था प्रभारी बना कर अप्रत्यक्ष रुप से संघ ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे दी है। अब यह तीनों पदाधिकारी संघ के तीसरे नेत्र के रुप में संगठन पर नजर रखने का कार्य करेंगे।
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