पिटी हुई 'फिल्म' को दोबारा रिलीज कर कांग्रेस नेता टमाटर के बजाय 'डंडे' खाने को हो रहे मजबूर
कांग्रेस पार्टी की तरफ से मोदी सरकार को घेरने के लिए जो भी रणनीति बनाई जाती है वो लगातार फेल हो रही है उसके बाद भी कांग्रेस के नेता अपने नेता राहुल गांधी को सही साबित करने के लिए घिसे-पिटे मुद्दे पर लाठी खाते नजर आ रहे हैं। दरअसल बिहार चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने एसआइआर को प्रमुख हथियार बनाया था। चुनाव प्रचार के दौरान वो लगातार वोट चोरी का आरोप लगाते रहे। निर्वाचन आयोग और भाजपा सरकार की आपसी सांठगांठ का जमकर आरोप लगाया लेकिन जब नतीजे आए तो कांग्रेस डबल डिजिट तक नहीं पहुंची। मतलब साफ है कि कांग्रेस ने एसआइआर को राष्ट्रीय मुद्दा बनाने का प्रयास किया लेकिन जनता ने पूरी तरह से उस मुद्दे को नकार दिया उसके बाद भी कांग्रेस नेताओं की आंख नहीं खुली। और गुरुवार को भोपाल में कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में कांग्रेस नेता एसआइआर के मुद्दे पर फिर सड़क पर उतरे। कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ता अरेरा हिल्स स्थित निर्वाचन आयोग के कार्यालय का घेराव करने जा रहे थे। उसके पहले ही पुलिस ने बैरीकेटिंग कर कांग्रेस के प्रदर्शन को तहस नहस करने की योजना बना रखी थी। कांग्रेस के नेता जब अरेरा हिल्स की तरफ बढ़ रहे थे तभी उन्हें पुलिस ने रोकने का प्रयास किया। पुलिस के मना करने पर कांग्रेसी नहीं रूके तो पानी की बौछार उनपर की गई। कांग्रेस कार्यकर्ता बैरीकेट के ऊपर चढ़ गए और आगे बढ़ने लगे। पुलिस के बार-बार समझाने पर जब कांग्रेसी नहीं रुके तो पुलिस ने कुछ कांग्रेसियों पर लाठी भी भांजी। जिससे कुछ कार्यकर्ताओं को हल्की चोट भी आई है। कांग्रेस का यह प्रदर्शन प्रदेश की जनता के दिल में जगह बनाने के लिए था लेकिन जनता के बीच में प्रदर्शन को लेकर किसी प्रकार की सहानुभूति देखने को नहीं मिली। मतलब साफ है कि हर बार की तरह कांग्रेस का यह मुद्दा भी फ्लाप साबित हुआ उसके बाद भी कांग्रेस के नेता अपने नेता को खुश करने के लिए एसआइआर के नाम पर प्रदर्शन कर लाठियां खाने को मजबूर हो रहे हैं। कांग्रेस नेताओं की इस प्रकार की हरकतें देख कर ऐसा लगता है कि जो फिल्म पिट चुकी है उसी को दोबारा रिलीज करके कांग्रेस के नेता तालियां बटोरने के बजाय 'डंडे' खाने को मजबूर हो रहे हैं।
What's Your Reaction?