भाजपा के दो वरिष्ठ मंत्रियों के बीच अचानक हुई मंत्रणा कहीं आने वाले तूफान का संकेत तो नहीं
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार में बाहर से देखने में तो सबकुछ ठीक-ठाक लगता है लेकिन अंदर क्या चल रहा है इसका अंदाजा प्रदेश के हर नागरिक को है। प्रदेश सरकार में पोर्टपोलियो के तौर पर मंत्री तो बनाए गए हैं लेकिन वो सभी कागजों तक ही सीमित हैं। किसी मंत्री के पास इतना अधिकार तक नहीं कि वो अपने विभाग से संबंधित किसी चपरासी का तबादला तक कर सकें। सरकार के अंदर हर मंत्री घुटन महसूस कर रहा है लेकिन कुछ बोल नहीं सकता क्योंकि पोर्टपोलियो के तहत गाड़ी और बंगले के साथ उन्हें जो सुविधाएं मिल रही हैं वो भी छिनने का डर सताता रहता है। जिस प्रकार से मोहन कैबिनेट से मंत्री नदारत रह रहे हैं वो एक बानगी के रुप में सबके सामने आ चुका है कि सरकार में रहने वाले मंत्रियों की मोहन सरकार में क्या अहमियत है। ऊपर से जिन वरिष्ठ नेताओं को मंत्री बनाया गया है वो ज्यादा घुटन महसूस कर रहे हैं। ऐसे ही दो मंत्रियों की तस्वीर इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों ही नेता किसी जमाने में भाजपा का चेहरा माने जाते थे। लेकिन आज उन दोनों नेताओं की हैसियत सरकार में क्या है ये किसी से छिपी नहीं है। ऐसी स्थिति में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल के बीच हुई मीटिंग चर्चा का विषय बनी हुई है। दोनों नेता सरकार में सबसे सीनियर मंत्रियों के रुप में शामिल हैं। लेकिन दोनों नेता सिर्फ कहने के लिए ही सीनियर हैं। बांकी उनके हाथ में कुछ करने का अधिकार नहीं है। दो साल से अधिक का वक्त तो दोनों नेताओं ने जैसे तैसे करके बिता लिया लेकिन अब इनके सब्र का बांध फूटने की कगार पर है। प्रहलाद पटेल के निवास पर हुई कैलाश विजयवर्गीय की यह मुलाकात कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है कि कहीं तूफान से पहले की तो यह शांति नहीं। दोनों नेताओं ने करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में चर्चा की। तस्वीर में दोनों नेताओं के चेहरे पर मुस्कान है लेकिन उस मुस्कान के पीछे कितना दर्द छिपा है ये दोनों नेता ही जानते हैं। इस मुलाकात के बाद यह कहा जा सकता है कि अब कुछ बड़ा होने वाला है जिसके लिए प्रदेश की जनता को तैयार रहना होगा।
What's Your Reaction?