'चिता पर लेटे किसान' सरकार चुनाव में व्यस्त केन-बेतवा के विस्थापितों से मिलने छतरपुर पहुंचे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार
केन-बेतवा लिंक परियोजना के नाम पर हजारों परिवारों को उजाड़ने की तैयारी में जुटी भाजपा सरकार के खिलाफ छतरपुर की बराना नदी का किनारा अब आक्रोश का मैदान बन चुका है।
रविवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आंदोलनस्थल पहुंचे और चिता पर लेटे किसान, दलित और आदिवासी परिवारों से मिलकर सरकार को आड़े हाथों लिया।
"शर्म करो, ये कैसा विकास?"
बराना तट पर पिछले कई दिनों से विस्थापित लोग चिता सजाकर बैठे हैं। मांग एक ही है - पहले पुनर्वास, फिर परियोजना। लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
उमंग सिंघार ने आंदोलनकारियों के बीच जाकर कहा,
"ये कैसा विकास है जिसमें किसान की जमीन छीन ली जाए, आदिवासी का घर तोड़ दिया जाए और उसे सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया जाए? सरकार की संवेदनहीनता की हद हो गई है कि जनता को अपनी मांग के लिए चिता पर लेटना पड़ रहा है।"
उन्होंने साफ चेतावनी दी कि कांग्रेस विस्थापितों के साथ सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी। "अगर उचित मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं दिया गया तो आने वाले चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।"
भाजपा के 'विकास' का काला सच
स्थानीय लोगों का आरोप है कि केन-बेतवा के नाम पर सिर्फ कागजों में विकास दिखाया जा रहा है। जमीन के बदले मिल रहा है धोखा और वादों के बदले मिल रही है लाठियां।
आंदोलनकारियों ने नेता प्रतिपक्ष को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि सरकार तुरंत बातचीत करे, वरना आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
उमंग सिंघार के इस दौरे के बाद छतरपुर की सियासत गरमा गई है। अब देखना होगा कि सरकार जागती है या विस्थापितों को चिता पर ही सोने देती है।
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