राज्यसभा की तीसरी सीट पर कैलाश को मिल सकता है 'विजय' का टारगेट कांग्रेस के हाथ लगेगा 'घंटा'
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की उल्टी गिनती चालू है। तारीखों का ऐलान हो चुका है लेकिन उम्मीदवार चयन को लेकर भाजपा और कांग्रेस में अब तक मंथन का दौर चल रहा है। भाजपा की तरफ से सीएम मोहन यादव लगातार दो दिन से दिल्ली दौरा कर राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर रहे हैं तो वहीं बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी बुधवार को दिल्ली पहुंच कर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान राज्यसभा चुनाव और उसके प्रत्याशियों को लेकर चर्चा हुई लेकिन सबसे अहम तीसरी सीट रही जो कांग्रेस खाते की है। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है लेकिन तीसरी सीट के लिए अगर भाजपा को कांग्रेस के कुछ विधायकों से समर्थन मिलता है तो कैलाश विजयवर्गीय के नाम पर फाइनल मुहर लग सकती है। मतलब साफ है कि भाजपा की टीम कांग्रेस विधायकों के बीच सुरंग बनाने में जुट गई है। अगर भाजपा कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित करती है तो मतलब साफ है कि भाजपा ने कांग्रेस खेमें में खेला कर दिया है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश की 11 लोकसभा सीटों में कांग्रेस के पास तीन और भाजपा के खाते में आठ राज्यसभा सीटें हैं लेकिन भाजपा की तरफ से एक भी सवर्ण वर्ग के नेता को राज्यसभा नहीं भेजा गया है। भाजपा ने एससी,एसटी और ओबीसी वर्ग के नेताओं को ही राज्यसभा सदस्य बनाया है जिसके कारण भाजपा का सोशल इंजीनियरिंग फैक्टर फेल हो रहा है। वहीं कैलाश विजयवर्गीय के अलावा भाजपा अरविंद सिंह भदौरिया पर भी विचार कर रही है। जिन नामों का भाजपा नेतृत्व की तरफ से पैनल बना कर भेजा गया है उसमें लाल सिंह आर्य और विनोद गोटिया का भी नाम शामिल हैं। फिलहाल भाजपा की सबसे बड़ी माथापच्ची तीसरी सीट को लेकर है। खबर है कि भाजपा अपने राज्यसभा सांसदों की संख्या बढ़ाने के लिए हर स्तर की राजनीति और दांवपेंच आजमाने का प्रयास कर रही है। अगले एक दो दिन एमपी बीजेपी और कांग्रेस के लिए काफी कठिन माने जा रहे हैं। जिस प्रकार से कैलाश विजयवर्गीय का नाम तीसरी सीट के लिए उभर कर आया है उससे साफ है कि भाजपा ने काफी मजबूत रणनीति के तहत कैलाश विजयवर्गीय पर दांव लगाने की योजना तैयार की है। वर्तमान सरकार में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पहले ही राष्ट्रीय नेतृत्व में जाने की इच्छा जता चुके हैं। लिहाजा राज्यसभा के नाम पर उनके सामने एक सुनहरा मौका है। साथ ही अगर भाजपा कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा का टिकट देती है तो यह तय है कि कांग्रेस के हाथ 'घंटा' लगने के अलावा कोई और रास्ता नहीं है।
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