कोई 'माई का लाला आरक्षण नहीं छीन सकता' उमा भारती द्वारा सोच समझ कर दिया गया बयान
पूर्व सीएम उमा भारती एक राजनेत्री होने से पहले साध्वी हैं। और साधू की कोई जात नहीं होती। करीब साल भर पहले एक प्रेस वार्ता में जिस उमा भारती ने कहा था कि उनका परिवार और जाति से अब कोई संबंध नहीं है क्यों वो साध्वी बनने से पहले खुद का पिंडदान करके आई हैं। लेकिन राजनीतिक महत्वाकांक्षा उनको अब जाति के मोहपाश में लेकर आई और वो कह रही हैं कि कोई माई का लाल देश में आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। उमा भारती का यह बयान मंगलवार को राजा हिरदेशाह लोधी की शौर्य यात्रा के दौरान दिया गया। ठीक यही बयान 12 जून 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में अनुसूचित जाति- जनजाति अधिकारी- कर्मचारी संघ (अजाक्स) के राज्य स्तरीय सम्मेलन में दिया था। उस एक बयान के कारण ही 15 साल से सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी की सरकार से बिदाई हो गई थी। अब एक बार फिर उस जख्म को ताजा करते हुए उमा भारती ने अपना उल्लू सीधा करने की कोशिश करने के बजाय भाजपा के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। इस बात में कोई सक नहीं कि भाजपा को सवर्णों ने ही अपने खून पसीने से सींचा है। और आज उसी भाजपा के नेताओं का ओबीसी वर्ग की ओर ज्यादा झुकाव यह साबित करने के लिए काफी है कि भाजपा की सोच और विचारधारा बदल चुकी है। कुछ राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उमा अब उस दौर में आ चुकी हैं कि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है। लेकिन बुढ़ापे में एक बार फिर वो अपनी राजनीतिक महत्वकाक्षां को पूरा करना चाहती हैं। उमा भारती झांसी से लोकसभा का चुनाव लड़ने की घोषणा कई बार कर चुकी हैं लेकिन अब तक उनको केन्द्रीय नेतृत्व की तरफ से कोई महत्व नहीं दिया गया है। इसी लिए उमा भारती अब जाति आधारित राजनीति का सहारा लेकर मुखर हो रही हैं। उमा को लग रहा है कि भाजपा उनको टिकट दे अन्यथा वो इस प्रकार के बयान देकर भाजपा की मुसीबतें बढ़ाने का काम करती रहेंगी और उनको दाल नहीं गली तो भाजपा की दाल भी नहीं गलने देंगी।
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