तूफान से पहले भाजपा कार्यालय में 'खामोशी' का आलम सिर्फ तबादले वाले आते हैं भाजपा कार्यालय
कार्यकर्ताओं से हमेशा गुलजार रहने वाला मध्य प्रदेश भाजपा कार्यालय पिछले कुछ दिनों से वीरान नजर आ रहा है। नौ-तपे का असर पार्टी के नेताओं और प्रदेश की सियासत में भी देखने को मिला। हांलांकि इस बीच बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की भी उपस्थिति प्रदेश कार्यालय में न के बराबर रही और उनके साथ ही पार्टी के अन्य पदाधिकारी भी गर्मियों की छुट्टियों में व्यस्त रहे। जिसके कारण प्रदेश कार्यालय सूना और वीरान नजर आ रहा था। निगम-मंडल अध्यक्षों की घोषणा होने के बाद प्रदेश कार्यालय में अचानक सन्नाटा पसर गया। कार्यकर्ताओं ने भी दूरी बना ली। दरअसल भाजपा कार्यालय में हमेशा कार्यकर्ताओं का मजमा लगा रहता है लेकिन पिछले कुछ महीनों से पार्टी के अप्रत्याशित फैसलों से कार्यकर्ताओं के दिल पर गहरा आघात पहुंचा है। भाजपा के अंदर सिर्फ पदाधिकारियों के अंदर ही अंतरद्वंद की स्थिति नहीं बल्कि आम कार्यकर्ताओं मन में भी अंतरद्वंद की स्थिति बनी हुई है। अब कार्यकर्ता यही कहते नजर आते हैं कि पद की बात आती है तो संघ के लोग आगे होते हैं अथवा किसी बड़े नेता के करीबियों को आगे कर दिया जाता है उनके हिस्से में सिर्फ टाट-दरी बिछाने का ही काम आता है। कुल मिला कर भाजपा कार्यकर्ताओं के दिल में एक ऐसा लावा दहक रहा है जिसके विस्फोट से कुछ भी हो सकता है। प्रदेश कार्यालय में छाई खामोशी इस बात के चीख-चीख कर संदेश दे रही है कि भाजपा में जल्द ही कुछ बड़ा होने वाला है और उसकी के पहले की खामोशी का असर भाजपा कार्यालय में खूब देखने को मिल रहा है। इस वक्त भाजपा कार्यालय में अगर कुछ लोगों की संख्या दिखती है तो वो सिर्फ तबादले वालों की होती है। क्योंकि सोमवार से शुक्रवार तक सहयोग सेल में मंत्री बैठते हैं लिहाजा यही एक सुरक्षित स्थान है जहां पर माननीय सीधे मिल जाते हैं और जरुरतमंद वहीं जाकर अपना आवेदन दे देते हैं।
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