कांग्रेस के 'राहू-केतू' भाजपा के लिए बनेंगे समस्या का सबब समय रहते नहीं हुआ उपचार तो चुकानी पड़ेगी बड़ी कीमत
15 महीने को छोड़ कर भाजपा की सरकार को मध्य प्रदेश में करीब 22 साल का समय बीत चुका है। मजे की बात यह है कि लंबे समय तक विपक्ष में रहने के कारण कांग्रेस नेताओं की हिम्मत जवाब देने लगी तो हजारों लाखों कार्यकर्ताओं ने भाजपा ज्वाइन कर लिया लेकिन उनका कांग्रेसी मोह और विचारधारा आज भी कांग्रेसी ही है। पंजा छाप भाजपाई नेता अब राहू और केतू की भूमिका में हैं। शास्त्रों के मुताबिक अमृत पीने के लिए राक्षस राहू ने देवताओं का वेस बना कर अमृत पान किया था। ठीक उसी प्रकार चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस के कई नेताओं ने भाजपा ज्वाइन किया और चुनाव जीत कर विधायक बने लेकिन उनकी सोच-विचारधारा और उनके समर्थक सब कांग्रेसी ही हैं। ऐसे ही नेताओं में एक विधायक त्योंथर विधानसभा से सिद्धार्त तिवारी हैं जिन्हें भाजपा कार्यकर्ताओं से एलर्जी है। वो सिर्फ कांग्रेस समर्थकों के घर जाना पसंद करते हैं। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बताए काम को ही करते हैं। कुल मिला कर हाथ में फूल थाम कर पंजे को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। सिद्धार्त तिवारी का DNA कांग्रेस का है। उनके दादा श्रीनिवास तिवारी,पिता सुंदरलाल तिवारी कांग्रेस से विधायक रहे हैं। खुद सिद्धार्त तिवारी कांग्रेस से चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन वहां पर उनके नसीब में हार ही लिखी थी। साल 2023 में ऐन मौके पर वो भाजपा में आए और त्योंथर से चुनाव लड़ कर जीतने में कामयाब रहे। सिद्धार्त तिवारी जैसे ही भाजपा से विधायक बने तो बूढ़े हो चुके कांग्रेस के कार्यकर्ता एक बार फिर जवान हो गए। हजारों की संख्या में ऐसे कांग्रेसी हैं जो हैं तो कांग्रेस में लेकिन काम भाजपा विधायक से करवा रहे हैं। भाजपा विधायक सिद्धार्त तिवारी भी सबसे पहले कांग्रेसियों के घर जाते हैं उनके पांव छूते हैं और आशीर्वाद लेकर उनका काम करने का वादा करते हैं। वहीं जो भाजपा के कार्यकर्ता सालों से भाजपा के प्रति पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं उनके हाथ सिर्फ ठेंगा लग रहा है क्योंकि उनके विधायक उन्हें पहचानते ही नहीं हैं।
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