'ब्राह्मणों' की 'लाड़ली' बेटियों से भेदभाव पर उतारु प्रदेश की सरकार संतोष वर्मा पर फैसला लेने में अब तक रही नाकाम
आइएएस संतोष वर्मा के विवादित बयान को लेकर प्रदेश भर में खूब आंदोलन हुए। सड़क से लेकर मंत्रालय तक आंदोलन अब भी लगातार जारी हैं लेकिन प्रदेश की मोहन सरकार बेटियों की अस्मिता से ज्यादा वोट बैंक को महत्व देती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने यहां पर अपनी दोहरी मानसिकता का भी परिचय दिया है। सरकार ने यह बता दिया है कि उसकी नजर में ब्राह्मण बेटियों की क्या इज्जत है। हर समाज के विकास की बात करने वाली मोहन सरकार ने जिस प्रकार से संतोष वर्मा मामले में हठधर्मिता पूर्वक रवैया अपना रखा है। उससे यह समझ में आने लगा है कि सरकार की नजर में ब्राह्मण बेटियों का सम्मान क्या मायने रखता है और अन्य समाज के बेटियों के सम्मान को लेकर राज्य सरकार कितनी गंभीर है। संतोष वर्मा की जगह पर अगर कोई ब्राह्मण अधिकारी बयान दिया होता तो क्या सरकार अब तक चुप रही होती यह एक बड़ा सवाल है। संतोष वर्मा को सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से कारण बताओ नोटिस जारी हुआ था। जिसका जवाब भी संतोष वर्मा ने दे दिया है लेकिन उसके बाद भी सरकार ने कोई एक्शन लेने में अब तक हिम्मत नहीं दिखाई है। जिस प्रकार से मोहन सरकार ने दोहरा रवैया अपना रखा है उससे यह स्पष्ट होने लगा है कि ये सरकार सिर्फ ओबीसी,एससी और एसटी वर्ग की है और इन्हीं वर्गों की उसे जरुरत है। संतोष वर्मा मामले में पिछले कई दिनों से आंदोलन चल रहे हैं लेकिन सीएम मोहन यादव की जुवान से अब तक ब्राह्मण बेटियों के नाम पर एक भी शब्द नहीं निकला है। सरकार खुद यह बता रही हैं कि उसकी नजर में ब्राह्मणों की लाड़ली बेटियों का सम्मान क्या मायने रखता है।
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