मोहन सरकार में पल रहा 'तूफान' अगस्त के महीने में 'सुनामी' के आसार
मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में क्या सबकुछ ठीक चल रहा है। बाहर से तो सब ठीक दिखता है लेकिन अंदर मौजूद मुखबिरों की मानें तो सरकार के अंदर इतना बड़ा तूफान पल रहा है जो कभी भी सुनामी का रुप ले सकता है। आम तौर पर भाजपा में इस तरह की परिस्थितियां नहीं बनती थी लेकिन सीएम मोहन यादव को लेकर सरकार के ज्यादातर मंत्रियों में असंतोष की स्थिति है। दरअसल इस सरकार में मंत्री तो बनाए गए हैं लेकिन उन मंत्रियों की स्थिति ऐसी है जैसे किसी कक्ष में रखे फूलदान की होती है जिसे आप देख सकते हैं लेकिन छू नहीं सकते हैं। किसी भी मंत्री के पास इतना अधिकार नहीं है कि वो अपने विभाग में अपनी इच्छा से कोई भी नवाचार कर सके सिर्फ पोर्टपोलियो के लिए मंत्री बनाए गए हैं बांकी उनके पास अधिकार नाम की कोई चीज नहीं है। वर्तमान सरकार में करीब डेढ़ दर्जन मंत्री अपने मुखिया से नाराज हैं। पिछले दो हफ्ते से कैबिनेट बैठक नहीं हुई जिसके पीछे भी यही कारण निकल कर सामने आ रहा है कि मंत्री नाराज हैं और कैबिनेट बैठक में नहीं आना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में कैबिनेट बैठकों को टालने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था। ऐसा भी नहीं कि सरकार के अंदर पल रहे तूफान की जानकारी केन्द्रीय नेतृत्व को नहीं है। वहां पर सारी जानकारी पहुंच रही है। मोहन सरकार में मौजूद विभीषण लगातार केन्द्रीय हाई कमान के पास सरकार के अंदरखाने की जानकारी पहुंचा रहे हैं। दिल्ली भी इस बात को लेकर हैरान और परेशान हैं कि एमपी बीजेपी में पल रहे इस तूफान को शांत कैसे किया जाए। सीएम मोहन यादव के दिल्ली दौरे भी यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि वो केन्द्रीय नेतृत्व की सुनवाई में गए थे। दरअसल सीएम और मंत्रियों के बीच विवाद तो शुरु से चल रहे हैं लेकिन उन विवादों को उस वक्त और हवा मिली जब सीएम पर कथित रुप जमीन खरीदी का आरोप लगा। इस पूरे मामले में सीएम ने तो खुद सफाई नहीं दी उल्टे उन्होंने मंत्रियों को आगे कर दिया। सीएम का आदेश मिलने के कारण मंत्री के सामने मरते क्या न करते जैसी स्थिति निर्मित हुई तो उन्होंने सीएम के बचाव में सफाई दी। लेकिन न चाहते हुए भी उनसे बयान दिलवाया गया इस लिए नाराजगी बनी हुई है। वरिष्ठ मंत्रियों में कैलाश विजयवर्गीय की कहानी किसी से छुपी नहीं है। प्रहलाद पटेल अपनी इज्जत ढके रहने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। ठीक उसी प्रकार राकेश सिंह भी अपनी राजनीतिक इज्जत का ज्यादा सरकार के काम पर कम ध्यान दें रहे हैं। विवाद इतना बढ़ चुका है कि अब बड़े पदाधिकारियों की मध्यस्थता का भी कोई असर पड़ता नजर नहीं आ रहा है। मुखबिरों से मिली सूचना के अनुसार तीन अगस्त के बाद मध्य प्रदेश में कुछ बड़ा होने वाला है।
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