मोहन सरकार ने लिया RBI से 3600 करोड़ का नया कर्ज वित्तीय वर्ष में अब तक 12800 करोड़ का कर्ज ले चुकी सरकार

Jul 9, 2026 - 08:55
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मोहन सरकार ने लिया RBI से 3600 करोड़ का नया कर्ज वित्तीय वर्ष में अब तक 12800 करोड़ का कर्ज ले चुकी सरकार

मध्य प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बदहाल कर दिया है और MP को कर्ज के दलदल में धकेल दिया है।

पटवारी ने आरोप लगाया कि मोहन सरकार ने हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियां जारी कर बाजार से 3,600 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है। इसके साथ ही प्रदेश पर कुल कर्ज 5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।

वित्तीय वर्ष में अब तक 12,800 करोड़ की उधारी
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकार अब तक 12,800 करोड़ रुपये उधार ले चुकी है। सरकार ने पूरे साल में 78,500 करोड़ रुपये उधार लेने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 16.30 प्रतिशत राशि शुरुआती महीनों में ही ले ली गई है।

उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2026 तक प्रदेश पर 4,88,714.17 करोड़ रुपये का कर्ज था। नई उधारी के बाद यह आंकड़ा 5 लाख करोड़ के पार चला गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि MP पर चढ़ा कर्ज अब राज्य सरकार के वार्षिक बजट से भी अधिक हो चुका है।

"कर्ज लिया, पर जनता को क्या मिला?"
जीतू पटवारी ने सवाल किया कि इतना भारी कर्ज लेने के बाद भी किसानों को खाद और सिंचाई नहीं मिल रही, युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल हैं, शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है और विकास कार्य ठप हैं। 

"यदि कर्ज विकास के लिए लिया जा रहा है तो उसका परिणाम जनता को क्यों नहीं दिखाई दे रहा?" पटवारी ने कहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा केवल कर्ज के ब्याज में चुकाना पड़ रहा है। जनता के टैक्स का पैसा विकास पर खर्च होने के बजाय ब्याज चुकाने में जा रहा है, जिसका बोझ आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।

भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची का आरोप
पटवारी ने कहा कि आर्थिक बदहाली के बावजूद सरकार फिजूलखर्ची पर रोक लगाने को तैयार नहीं है। अनावश्यक प्रचार-प्रसार और दिखावे पर खुलकर खर्च हो रहा है। भाजपा की "पैसा दो–काम लो" की संस्कृति ने भ्रष्टाचार को संस्थागत रूप दे दिया है और सरकारी खजाने को खोखला कर दिया है।

पटवारी की 3 मांगें
1.  प्रदेश की वास्तविक आर्थिक स्थिति पर श्वेत पत्र जारी किया जाए
2.  अब तक लिए गए कर्ज का पूरा हिसाब जनता के सामने रखा जाए 
3.  कर्ज की राशि किन-किन मदों में खर्च हुई, इसकी जानकारी दी जाए और कर्ज संकट से बाहर निकालने की ठोस योजना बताई जाए

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