भाजपा सरकार की कार्यशैली से 'सामान्य वर्ग' का मोह भंग आने वाला समय होगा कठिन
देश में मोदी और मध्य प्रदेश में मोहन की सरकार है। दोनों ओबीसी वर्ग से आते हैं। लेकिन इनके राज में सामान्य वर्ग के प्रति जिस प्रकार से नफ़रत के बीज बोए गए और उसकी बानगी के तौर पर संतोष वर्मा जैसे अधिकारियों के द्वारा ब्राह्मण बेटियों के खिलाफ अपशब्द कहने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई न करने से देश भर के न सिर्फ ब्राह्मण वर्ग वल्कि पूरे सामान्य वर्ग के मन में भाजपा के प्रति विचार बदल दिया है। इतिहास गवाह है कि जिस पार्टी से भी सामान्य वर्ग का मोह भंग हुआ है उस पार्टी का पतन हुआ है। एक दौर हुआ करता था जब सामान्य वर्ग का समर्थन कांग्रेस को हुआ करता था और उसकी न सिर्फ देश में बल्कि प्रदेशों में भी सरकार हुआ करती थी लेकिन सोनिया और राहुल का दौर आते ही कांग्रेस में सामान्य वर्ग को उपेक्षित किया जाने लगा इस लिए सामान्य वर्ग ने भाजपा को अपना नया ठिकाना बना लिया लेकिन वोट की राजनीति के चक्कर में भाजपा ने भी सामान्य वर्ग की उपेक्षा करना शुरु कर दिया। जबकि बीजेपी में आज के नेता शायद ये भूल गए कि उनकी पार्टी का बीज ही दो ब्राह्मणों ने बोया था जिसके पौधे के नीचे आज पूरी भाजपा फल और फूल रही है। समय के साथ-साथ पूरी भाजपा में ओबीसी वर्ग का कब्जा हो गया और सामान्य वर्ग के योग्य नेताओं को भी साइड लाइन कर दिया गया। भाजपा सरकार में और पार्टी में सामान्य वर्ग की सिर्फ उपेक्षा ही नहीं की गई बल्कि सामान्य वर्ग के खिलाफ एक माहौल भी क्रिएट किया गया। आए दिन ब्राह्मणों के खिलाफ अपशब्द कहे जाते हैं यहां तक कि अब तो शंकराचार्यों को भी निशाने पर लिया जा रहा है। अधिकारियों और नेताओं द्वारा कहे गए किसी भी अपशब्द पर सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया। भगवा और हिंदुत्व की बात करने वाली भारतीय जनता पार्टी में आज ब्राह्मण सुरक्षित नहीं है। सामान्य वर्ग के युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं है। मुश्लिमों का विरोध करने वाली भारतीय जनता पार्टी देखते ही देखते ब्राह्मण और पूरे सामान्य वर्ग का अप्रत्यक्ष तरीके से विरोध करने लगी। देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो उसके नेताओं को लग रहा है कि सबकुछ ठीक चल रहा है। लेकिन हकीकत तो यही है कि सामान्य वर्ग बुद्धिजीवी वर्ग होता है। एक हद तक विरोध करता है। उसके बाद भी जब सरकार और संगठन की नींद नहीं खुलती है तो समय आने पर उसका जवाब देता है। और अब जिस प्रकार से मध्य प्रदेश में सामान्य वर्ग विरोधी माहौल चल रहा है उसका खामियाजा भी प्रदेश की भाजपा सरकार को ही उठाना पड़ेगा। भाजपा शायद 2018 का विधानसभा चुनाव इतनी जल्दी भूल गई जब 40 फीसदी सामान्य वर्ग भाजपा से अलग हुआ तो प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस की सरकार ने वापसी कर लिया था। जिस दिन 60 फीसदी भी सामान्य वर्ग भाजपा से अलग हो जाएगा उस दिन भाजपा की क्या हालत होगी।
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