भाजपा संगठन ने पद मुक्त किया तो सरकार ने सभी अधिकार छीने गैर अनुशासित नेताओं पर बड़ी कार्रवाई कर दिया संदेश
मध्य प्रदेश भाजपा एक प्रयोगशाला के तौर पर काम करती है। केन्द्रीय नेतृत्व द्वारा जारी किसी भी दिशा निर्देश का सबसे पहले मध्य प्रदेश में ही पालन किया जाता है। और उसकी बानगी भी एक दिन पहले ही देखने को मिली है। जब पीएम मोदी के आह्वान को नहीं मानने वाले दो नेताओं पर कार्रवाई कर पार्टी के अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश दिया गया। पहली कार्रवाई प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने की जब भिंड किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष सज्जन सिंह यादव के सैकड़ों वाहनों के शक्ति प्रदर्शन की खबर आई तो प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हें पद मुक्त कर संगठन को बड़ा संदेश दिया। संगठन की तरफ से की गई कार्रवाई के बाद सौभाग्य सिंह के काफिले को लेकर भी आवाज उठने लगी। मामला सरकार स्तर पर था क्योंकि वो पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। पदभार ग्रहण के दौरान वो करीब 700 वाहनों का काफिला लेकर प्रदेश कार्यालय पहुंचे थे। उनके काफिले के कारण आधा शहर जाम हो गया था। और यह मामला तब सरकार के संज्ञान में आया जब मीडिया में सौभाग्य सिंह को लेकर जमकर खबरें चलने लगी। राज्य सरकार के पास दूसरा कोई रास्ता भी नहीं था। क्योंकि संगठन अपना काम कर चुका था अब बारी प्रदेश के सीएम की थी। आखिरकार शाम को सीएम मोहन यादव के आदेश पर सौभाग्य सिंह के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर कहा गया कि जब तक आपका लिखित स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं हो जाता तब तक आपके सारे प्रशानिक और वित्तीय अधिकारों पर प्रतिबंध लगाया जाता है। राज्य सरकार ने सौभाग्य सिंह के पाठ्य पुस्तक निगम के कार्यालय अथवा परिसर में भी प्रवेश पर रोक लगा दी है। मध्य प्रदेश भाजपा संगठन और सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के पीछे एक बड़ा मैसेज देने का प्रयास किया गया है। इसके माध्यम से साफ बताया गया है कि अनुशासन का पालन नहीं करने वाले नेताओं को बक्सा नहीं जाएगा।
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