भाजपा कार्यकर्ताओं में कांग्रेसी 'कल्चर' हावी जिले की बैठक में दिखा कार्यकर्ताओं का असली चेहरा
भारतीय जनता पार्टी एक कैडर बेस पार्टी मानी जाती है। जहां अनुशासन को ही सर्वोपरि माना जाता है। लेकिन इसी दल में अब अनुशासन तार-तार होने लगा है और कार्यकर्ता बेलगाम होने लगे हैं। दरअसल साल 2023 से लेकर 24 के बीच भारतीय जनता पार्टी में करीब पांच लाख कांग्रेस कार्यकर्ताओं के शामिल होने का दावा किया गया था। कितने कार्यकर्ता आए वो भाजपा के अंदर का विषय है लेकिन जो भी कांग्रेस कार्यकर्ता भाजपा में आए वो तौर-तरीका ठीक कांग्रेस वाला ही है। किसी भी कार्यकर्ता में भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं की तरह शालीनता देखने को नहीं मिलती है। इस बात का खुलासा उस वक्त हुआ जब भाजपा प्रदेश कार्यालय में जिला भाजपा की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश,सीएम मोहन यादव,प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित तमाम वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। भोपाल जिले के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यकर्ता इतनी बड़ी संख्या में थे कि हाल में उनके बैठने यहां तक कि खड़ा होने के लिए जगह नहीं थी। आलम ये था कि गेट के पास भी लोग ठूस-ठूस कर खड़े थे क्योंकि उनके पास बैठने के लिए स्थान नहीं था। मीडिया अपना काम करती है और फिर निकल जाती है। ऐसे में कुछ मीडिया वाले हाल से बाहर निकलने लगे तो भाजपा कार्यकर्ताओं का कांग्रेस कल्चर बाहर आ गया। गेट खोलने के बजाय कहने लगे कि बार-बार अंदर बाहर होने की जरुरत नहीं है अंदर आ चुके हैं तो अंदर ही रहिए। लेकिन हकीकत तो यह है कि मीडिया का जब काम हो गया तो अंदर क्यों रुके। ऐसी स्थिति में तथाकथित भाजपा कार्यकर्ता मीडिया से भी उलझे आखिर में कड़ी मशक्कत के बाद उन्होंने दरवाजा खोला। गौरतलब है कि इस प्रकार का कल्चर सिर्फ कांग्रेस में देखने को मिलता था। भाजपा के कार्यकर्ताओं में शालीनता होती है। उनके बोलने के लहजे में भाई साहब नजर आता है लेकिन तथाकथित भाजपा कार्यकर्ता अब मूल भाजपा कार्यकर्ताओं की छवि खराब कर खुद की छवि संवारने में लगे हैं। ऐसे कार्यकर्ताओं का भाजपा में होने का मतलब सिर्फ और सिर्फ भाजपा का नुक़सान है उसके अलावा उनसे किसी फायदे की उम्मीद करना बेमानी है।
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