भाजपा के तीन नेताओं पर लटकी अनुशासन की तलवार सत्ता-संगठन संतुष्ट नहीं हुआ तो हो सकती है छुट्टी प्रीतम लोधी के लिए संविधान अलग
मध्य प्रदेश सरकार और संगठन की तरफ से अनुशासन तोड़ने वाले नेताओं पर कार्रवाई का दौर शुरु हो चुका है। सबसे पहले संगठन ने कदम उठाया था जहां भिंड किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष को पद मुक्त किया गया था। उसके बाद सौभाग्य सिंह के सरकार ने सारे अधिकार छीन लिए थे। इन दोनों नेताओं ने पीएम मोदी की अपील को नहीं माना था और सैकड़ों वाहनों से रैली निकाल कर शक्ति प्रदर्शन किया था। इन दो नेताओं के बाद अब तीन और नेताओं के ऊपर अनुशासन की तलवार लटक गई है जिसमें पवन पाटीदार भाजपा ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष,महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव और सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेन्द्र गोयल को 17 मई को प्रदेश नेतृत्व के सामने तलब किया गया है। इन तीनों का जवाब अगर संतोष जनक नहीं रहा तो इन्हें पद से भी हाथ धोना पड़ सकता है। भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष पवन पाटीदार ने ग्वालियर में एक बड़ी वाहन रैली का आयोजन किया था। वहीं महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने छतरपुर में लग्जरी गाड़ियों की वाहन रैली निकाल कर सरकार और संगठन को आइना दिखाने का प्रयास किया था। वहीं सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष वीरेन्द्र गोयल खुद तो प्रदेश कार्यालय में ई-रिक्शा पर सवार होकर सादगी का मुखौटा लेकर पहुंचे लेकिन उनके पीछे सैकड़ों वाहनों का काफिला मानो मोदी के आह्वान का मजाक उड़ा रहा हों। ऐसी स्थिति में सरकार और संगठन दोनों ने सख्त ऐक्सन लेने का फैसला लिया है। तीनों नेताओं को 17 मई को भोपाल स्थित प्रदेश कार्यालय में तलब किया गया है जहां पर प्रदेश नेतृत्व इन नेताओं से सवाल जवाब करेगा। इन नेताओं के जवाब से अगर सरकार और संगठन संतुष्ट नहीं हुआ तो इनकी पद से छुट्टी होना तय माना जा रहा है। संगठन और सरकार ने मिल कर अब अनुशासन को वरीयता देने का मन बना लिया है लेकिन इतना सबकुछ होने के बाद एक सवाल अब भी कायम है कि विधायक प्रीतम लोधी पर संगठन की इतनी मेहरबानी क्यों,क्या वो संगठन से ऊपर हैं अथवा खुद की सरकार और संगठन संचालित करते हैं जहां वकील भी वही हैं और जज भी वही हैं। इन कार्रवाइयों के बीच अन्य कार्यकर्ता दवी जुवां यही कहते नजर आ रहे हैं कि प्रीतम लोधी क्या विशेष आमंत्रित सदस्य हैं जिनके लिए भाजपा का संविधान बदल जाता है।
What's Your Reaction?